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सिलाई मशीन (SILAAI MACHINE) HINDI HORROR STORY



दीदी मैं बहुत मुसीबत में हूँ। मेरी सिलाई मशीन पता नहीं कहाँ चली गयी है। उसके बिना मैं काम कैसे करूँगा दीदी? मेरी सिलाई मशीन ढूँढवा दो दीदी।राकेश रेणु के सामने गिड़गिड़ा रहा था।

रेणु एक लम्बी छुट्टी के बाद अपने घर वापस आयी थी। रात भर की फ़्लाइट की थकान उतरने के लिए सुबह के वक्त सोने गयी ही थी की अचानक उसके दरवाज़े की घंटी ने उसे उठा दिया था। सामने राकेश खड़ा था जो बिना कुछ बोले सुने, अपने मुसीबत का गाना रेणु के सामने गाने लगा था।

राकेश की उम्र यही कोई 16 या 17 साल होगी। पूरी सोसायटी राकेश को ही अपने कपड़े सिलने या ऑल्टर करने के लिए देती थी। इसकी वजह ये नहीं थी की राकेश एक अच्छा दर्ज़ी था, बल्कि ये थी की वो सोसायटी के गेट के बाहर ट्रान्स्फ़ॉर्मर के नीचे ही बैठा मिल जाता था। तो एक तरह से राकेश का धंधा उसकी कारीगरी से नहीं, बल्कि लोगों के आलस की वजह से चलता था। लेकिन रेणु से राकेश को कुछ ज़्यादा ही लगाव था। उसके कपड़े वो खुद लेकर और देकर जाता, और भले ही पूरी सोसायटी उसके सर पे खड़ी होती, राकेश अपनी रेणु दीदी का काम सबसे पहले करता था। 

दीदी आप तो जानती हो की मेरा पूरा परिवार उसी मशीन से चलता है दीदी।राकेश अब रुआँसा हो गया था।अच्छा ठीक है, अब इमोशनल ब्लैकमेल मत कर राकेश। पता करती हूँ तेरी मशीन के बारे में।रेणु ने अपनी आँखें खोलते हुए कहा। ये कहकर वो पीछे मुड़ी लेकिन तभी उसे ध्यान आया की गर्मी के दिन हैं, और ये लड़का अपनी मशीन ढूँढने पता नहीं कहाँ कहाँ भटक रहा होगा।

अच्छा सुन,” रेणु ने दरवाज़े की ओर पलटते हुए कहा, “पानी पिएगा?”
लेकिन राकेश जा चुका था।

दोपहर को वो किसी काम से बाहर निकली तो उसने ध्यान दिया की ट्रैन्स्फ़ॉर्मर के नीचे वाक़ई में राकेश की सिलाई मशीन नहीं थी। वो गेट के पास बने गार्ड ऑफ़िस में घुसी और उसने देखा की राकेश की सिलाई मशीन अंदर रख रखी थी।

भोला भैया, आपने फिर से राकेश को तंग किया?” रेणु ने हैड गार्ड से शिकायत करते हुए कहा। वो जानती थी की भोला हमेशा राकेश के लिए मुसीबत पैदा करता रहता था। और राकेश भोला से डरता भी था।
उसकी मशीन यहाँ क्यूँ रखी हुई है? वो कबसे ढूँढ रहा है इसे।” 

भोला ने पहले रेणु के चेहरे को और फिर अपने पास बैठी महिला गार्ड को देखा, और फिर बोला, मैडम क्या कह रही हो आप? राकेश ने आपसे कब बात की?”

अरे आज सुबह ही आया था मेरे घर। रो रहा था भैया। प्रेसिडेंट मैडम से मैं बात कर लूँगी। चलो उसकी मशीन वापस रख दो।रेणु ने भोला के सामने कोई ऑप्शन छोड़ा ही नहीं।

भोला ने रेणु को मशीन की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, “मैडम एक बार इस मशीन को ध्यान से देखो।

इतना सुनने के बाद, रेणु ने अपनी आँखों पर चढ़ा धूप का चश्मा उतारा और राकेश की मशीन को अच्छे से देखा। और फिर उसका दिमाग़ चकराने लगा। चश्मे और जल्दबाज़ी की वजह से उसने उस मशीन की तरफ़ ध्यान ही नहीं दिया था, जो की कई जगहों से पिघल कर मुड़ गयी थी। जैसे कोई बिजली इस पर गिरी हो।

मैडम, आप शायद यहाँ थीं नहीं, लेकिन दो दिन पहले ये ट्रान्स्फ़ॉर्मर फट गया था। और राकेश उसी के नीचे बैठा काम कर रहा था। उसकी मशीन ने ट्रान्स्फ़ॉर्मर की बिजली पकड़ ली और राकेश वहीं का वहीं पूरा राख हो गया।भोला ने सारी कहानी बयान कर दी। हाँ दीदी,” महिला गार्ड बोली, “पूरा सरीर भसम हो गया छोरे का। कछु ना बचा।

अरे तुम चुप करो मौनी।भोला ने उसे डाँटा।

लेकिन अब रेणु की कल्पना में भोला और मौनी के शब्द घुस चुके थे। रेणु देख पा रही थी की कैसे राकेश ट्रान्स्फ़ॉर्मर के नीचे बैठा अपनी सिलाई मशीन पर काम कर रहा था। और तभी उसकी मशीन उस बिजली के बादल को अपनी तरफ़ खींच लिया। और फिर देखते ही देखते, राकेश राख का एक ढेर बन गया। उसकी चीखें रेणु के दिमाग़ की दीवारों से टकरा रहीं थीं।

रेणु अपलक उस सिलाई मशीन को देखती रही कि तभी मौनी ने आवाज़ दी,
“रेनू दीदी।

रेणु ने देखा मौनी के हाथ में एक कपड़े का थैला है।
अपने थैले को रेणु ने तुरंत पहचान लिया।

मरने से एक दिन पहले राकेस ने ये थैला दिया हा। 
कह रहा हा आपके कपड़ा हैं जा में।

रेणु ने थैला खोला, अंदर उसी का कुर्ता था जो उसने राकेश को सिलने के लिए दिया था। राकेश जाने से पहले रेणु का आख़िरी काम पूरा करके गया था। 

इसके बाद रेणु ने एक रिक्शा करके राकेश की सिलाई मशीन उसके घर पहुँचवाई घर का दरवाज़ा राकेश की 5 साल की बहन ने खोला। रेणु ने देखा की वो बच्ची घर में अकेली थी। 

बेटा मम्मी कहाँ हैं?” रेणु ने पूछा।
मम्मी काम पे गयीं हैं।उस छोटी बच्ची ने जवाब दिया। 

राकेश के बाद उसकी माँ को काम ढूँढना पड़ा। और जैसा कि ज़्यादातर घरों में होता है, अपने बच्चे साथ ले जाने वाली औरतों को काम नहीं मिलता। इसीलिए राकेश की माँ मजबूरी में उस 5 साल की बच्ची को अकेला घर में छोड़ के काम पर गयी हुई थी। रेणु ने कुछ पैसे उस लड़की के हाथ में थमाए। और चुपचाप वहाँ से चली गयी। 

उस रात नींद रेणु की आँखों से कोसों दूर थी। वो सोचती रही की आख़िर उन पैसों से राकेश के घर का कितना खर्चा चलेगा। यही सोचते सोचते अचानक एक आवाज़ ने उसका ध्यान खींचा। दरवाज़े पर कोई था।

रेणु ने उठकर दरवाज़ा खोला तो उसकी हड्डियाँ काँप गयीं। सामने राकेश खड़ा था। लेकिन एकदम झुलसा हुआ। रेणु के मुँह से शब्द और गले से आवाज़ नहीं निकल पा रही थी। 

लेकिन राकेश ने बोलना शुरू किया,
मेरी मशीन मुझे मिल गयी दीदी, आपको अपना सूट मिल गया?”

उसके बाद रेणु की आँख सुबह खुली तो उसने अपने आपको दरवाज़े पर खड़ा पाया। और उस दिन के बाद राकेश फिर कभी रेणु की दिखायी नहीं दिया, लेकिन अब राकेश की बहन की ज़िम्मेदारी रेणु ने अपने ऊपर ले रखी है।

राकेश की सिलाई मशीन उसकी माँ ने कबाड़ में बेच दी।
जिस से उसे 150 रुपए मिले।


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