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सिलाई मशीन (SILAAI MACHINE) HINDI HORROR STORY

“ दीदी मैं बहुत मुसीबत में हूँ। मेरी सिलाई मशीन पता नहीं कहाँ चली गयी है। उसके बिना मैं काम कैसे करूँगा दीदी ? मेरी सिलाई मशीन ढूँढवा दो दीदी। ” राकेश रेणु के सामने गिड़गिड़ा रहा था।

दिल (DIL) HINDI HORROR STORY



हॉस्पिटल में लेटा मयंक धीरे धीरे बेहोशी से बाहर ही रहा था कि तभी उसके कानों ने एक आवाज़ सुनी, “मयंक, उठ जा बेटा।
उस अनजान आवाज़ को सुन, मयंक ने अपनी आँखों को खोला पर सिर्फ़ इतना कि उसे एक धुंधली सी तस्वीर ही दिख पायी।लेकिन तभी, वो आवाज़ एक चीख में तब्दील होकर उसके कानों में पड़ी,  मयंक! उठ!!!”

मयंक बिस्तर में लेटा हुआ ही काँप गया। उसने पूरा ज़ोर लगाकर अपनी आँखें खोलीं, तो देखा सामने पीली साड़ी पहने एक औरत उसे ही देख रही थी। होश तो उसे अभी भी आधा ही था लेकिन उसका धुँधलापन साफ़ होते ही उसकी आँखों ने जो देखा, उसे उसका दिमाग़ मानने को तैयार नहीं था। मयंक को उस अधेड़ उम्र की औरत के चेहरे पर सूख चुके आंसुओं के धब्बे तो साफ़ दिखायी दे रहे थे, लेकिन एक चीज़ जो उसे नहीं दिख रही थी, वो थी उस औरत की आँखें। उसकी आँखों की जगह पर थे काले गहरे गड्ढे। एक बार को तो मयंक को लगा की उन गड्ढों में से झांकता अंधेरा उसे ही निगल जाएगा।

वो औरत धीरे धीरे तैरते हुए मयंक के क़रीब आयी। इतने क़रीब की मयंक अब अपने चेहरे पर उस औरत के सूख चुके बाल महसूस कर पा रहा था। उस औरत के बर्फ़ जैसे ठंडे हाथ मयंक की छाती को छू रहे थे। और तभी उसने मयंक के कान में फुसफुसाते हुए कहा, “मैं तेरे सीने में हाथ डालकर वो दिल निकाल लूँगी।

दवाओं के असर ने भले ही मयंक के पूरे शरीर को बेजान कर रखा था, लेकिन उसका दिमाग़ पूरी तरह से जाग चुका था। मयंक ने अपने जिस्म की पूरी ताक़त इकट्ठी की और उस औरत को दूर धकेलना चाहा। लेकिन ये क्या, मयंक का हाथ उस औरत के आर पार हो गया। पर उस औरत पर इसका कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। उसने अपना हाथ मयंक की छाती के ऊपर किया और सीधा अंदर घुसा दिया।

मयंक को लगा मानो बर्फ़ से बना एक ख़ंजर उसके सीने में उतर गया हो। एक चीख उसके गले से निकली। लेकिन तभी उस औरत के दूसरे हाथ ने मयंक के मुँह को ढक दिया। मयंक ने देखा की उस औरत का हाथ उसकी छाती में आधा समा चुका था। वो उसकी ठंडी उँगलियों की जकड़ अपने दिल के ऊपर महसूस कर पा रहा था। वो औरत सच कह रही थी, वो वाक़ई में मयंक के सीने से दिल निकालने वाली थी।

ये दिल तेरा नहीं है।वो औरत चीखी
उसकी उँगलियों का शिकंजा मयंक के दिल पर कस चुका था। अब बस एक झटका और वो दिल मयंक की छाती से बाहर आने को तैयार था।

लेकिन तभी मयंक ने अपने शरीर को एक ओर को झटका दिया और वो सीधा बिस्तर से नीचे गिर गया। 

वो औरत पलट कर मयंक की तरफ़ आयी। मयंक ने फिर ज़ोर लगाया लेकिन उसका जिस्म अब भी बेजान था। अपनी सारी ताक़त वो खुद को बिस्तर से नीचे गिराने में खर्च कर चुका था। औरत झुकी और अपना हाथ एक बार फिर से मयंक के सीने में उतारने लगी। शायद मयंक अपनी मौत को स्वीकार कर चुका था, इसलिए उसने अपनी आँखें बंद कर ली थीं।

लेकिन तभी एक नर्स कमरे के अंदर आयी और उसने देखा की मयंक ज़मीन पर पड़ा छटपटा रहा है। 
नर्स दौड़कर मयंक के पास आयी, और उसने मयंक का मुआयना करना शुरू किया। 

मयंक।उस नर्स ने मयंक का नाम लेकर बुलाया तो उसकी आँखें खुलीं। 
मयंक ने एक बार फिर कमरे में हर ओर देखा, वो औरत अब वहाँ नहीं थी। उसकी जान में जान आयी, और उसके मुँह से निकला, “वो औरत, वो औरत मेरा दिल निकल रही थी।

लेकिन नर्स ने मयंक की बातों को नींद की दवाओं का असर समझ कर अनसुना कर दिया।

नर्स तो मयंक को बिस्तर में लिटा कर चली गयी, लेकिन मयंक को उस रात फिर नींद नहीं आयी। हल्की सी आहत होने पर भी उसे लगता की वो औरत वापस गयी है। पर जब सुबह हुई तो मयंक को भी समझ में नहीं आया की वो औरत वाक़ई में एक सपना थी या हक़ीक़त।

जो भी हो, सुबह मयंक ने अपने छोटे भाई को अपने साथ रुकने के लिए कहा। 

अगली रात फिर से वही हुआ, वो औरत मयंक के सामने खड़ी हुई और उसका दिल निकालने की कोशिश करने लगी। लेकिन इस बार मयंक की चीख उसके छोटे भाई ने सुन ली। मयंक ने देखा की उसके भाई के जागते ही, वो औरत हवा में घुलकर ग़ायब हो गयी। छोटे भई ने नर्स को बुलाया जो मयंक की इस हालत के लिए उसकी दवाओं को दोष दे रही थी। 

लेकिन बिस्तर से नीचे गिरकर इन्हें चोट लग सकती है।नर्स ने मयंक के भाई से कहा। मयंक के लाख माना करने के बावजूद, नर्स ने मयंक को बिस्तर से बांध कर एक और नींद का इंजेक्शन लगा दिया। 

मयंक।उस औरत की आवाज़ से मयंक की आँख खुली। वो वापस चुकी थी और उसका हाथ फिर से मयंक के सीने में घुस रहा था। मयंक ने चीखना चाहा लेकिन औरत का दूसरा हाथ उसके मुँह को ढँक चुका था। मयंक ने हिलने की कोशिश की लेकिन नर्स ने उसे काफ़ी अच्छे से बांधा था। पर तभी मयंक को याद आया की नर्स ने केवल उसका धड़ बिस्तर से बांधा था। उसके पैर अभी भी आज़ाद थे। मयंक ने एक ज़ोर की लात बिस्तर के पास रखी दवाइयों की टेबल पर दे मारी। 
टेबल खिड़की से टकराई और एक तेज शोर के साथ सभी दवाइयाँ नीचे गिर के टूट गयीं। मयंक का छोटा भाई जाग गया, और उसके बाद नर्स भी दोबारा कमरे में गयी। औरत ग़ायब हो चुकी थी, लेकिन नर्स के चेहरे का ग़ुस्सा देख कर मयंक समझ गया था की उसकी मुसीबत और बढ़ने वाली है। मयंक फिर से अपने ही बिस्तर में क़ैद हो चुका था, और इस बार नर्स ने उसके पैर भी बांध दिए थे। मयंक अपने नसीब को कोसता हुआ वो रात याद करने लगा जब वो इस मनहूस हॉस्पिटल में आया था।

लगभग एक महीना पहले मयंक की गाड़ी का ऐक्सिडेंट एक सरिए लदे ट्रक से हुआ था जिसमें से एक सरिया मयंक के दिल के आर पार हो गया था। मयंक को जब अस्पताल लाया गया था उसे देख कर कोई भी ये नहीं कह सकता था की ये ज़िंदा बच पाएगा। 

क्यूँकि उसके बचने की एक ही उम्मीद थी, एक नया दिल।

नसीब से उसी अस्पताल में पिछले 4 सालों से राहुल नाम का एक लड़का कोमा में था। डॉक्टर और यहाँ तक की राहुल के घरवालों ने भी उसके जागने की उम्मीद छोड़ दी थी। राहुल की माँ अपने बेटे के ग़म में 6 महीने पहले ख़ुदकुशी कर चुकी थी। राहुल के परिवार में केवल उसकी बहन नीता बची थी, जो अपने भाई को फिर से चलता फिरता देखने की आस छोड़ चुकी थी। 

और उस रात जब उस हॉस्पिटल में मयंक को लाया गया, तो नीता को अपने भाई की अंधेरी ज़िंदगी का एक नया मक़सद दिखायी दिया। उसने अपने भाई के सोते हुए चेहरे को आख़िर बार देखा, और रोते हुए राहुल के हार्ट डोनेशन के काग़ज़ों पर साइन कर दिया।

राहुल ये दुनिया छोड़ कर जा चुका था लेकिन उसका दिल अब मयंक के सीने में धड़क रहा था।


अपने बिस्तर में बंधा मयंक यही सब याद करते हुए ना सोने की भरसक कोशिश कर रहा था। उस रात उसने अपनी नींद से जम कर लड़ाई की और अपने आप पर हावी नहीं होने दिया।सुबह होते ही उसने सबसे पहले अपने नालायक भाई को जमकर लताड़ लगायी और शोर मचा कर डॉक्टर को बुलाया। मयंक ने हॉस्पिटल के आगे शर्त रख दी की अगर उसका इलाज करना है तो उसे एक जनरल वार्ड में डाला जाए जहां वो अकेला ना रहे, और उसके साथ ही उस घटिया नर्स को खुद से दूर रखने की भी माँग की।
डॉक्टर ने मयंक की शर्तें माँ लीं और उसे एक जनरल वार्ड में भेज दिया।
उसी दिन मयंक से मिलने नीता आयी। डॉक्टर ने मयंक की अजीबो गरीब शर्तों की बातें राहुल की बहन को बता दी थी। 

लेकिन नीता का व्यवहार देख कर मयंक चौंक गया। उस लड़की ने बाक़ियों की तरह मयंक पर अविश्वास नहीं किया, बल्कि उसने मयंक की पूरी बात सब्र से सुनने के बाद एक फ़ोटो निकाल कर उसे दिखाया, “क्या यही वो औरत है?” नीता ने मयंक से पूछा।

उस औरत का चेहरा मयंक के दिमाग़ में छप चुका था। नीता के फ़ोटो में वही औरत थी। 
हाँ यही है वो औरत।मयंक ज़ोर से चीखा

नीता थोड़ी देर मयंक को देखती रही, और फिर एक लम्बी साँस लेकर बोलीये मेरी माँ हैं।
मयंक को समझ नहीं आया की वो नीता से क्या कहे। 

नीता ने मयंक को बताया की उसकी माँ, राहुल से इतना प्यार करती थीं की राहुल के ना जागने पर उन्होंने मन्नत माँगी थी की भगवान उनकी जान लेकर उनके बेटे को नयी ज़िंदगी दे। और एक दिन, राहुल की माँ की लाश उनके घर में मिली। पर इसके बावजूद राहुल नहीं उठा।

नीता मेरी काफ़ी अच्छी दोस्त है, और हम दोनों साथ काम भी करते हैं। उस दिन मयंक से मिलने के बाद अपने घर आयी और उसने मुझे फ़ोन करके सब बताया हमने मिलकर नीता की माँ की आत्मा की शांति के लिए एक पूजा करवायी। इसके बाद नीता ने कई बार मयंक से फ़ोन पर बात की और मयंक ने उसे बताया की उसके बाद नीता की मम्मी उसे फिर नहीं दिखायी दीं। वो अब डर के मारे उन्हें आंटी बुलाने लगा था।

लेकिन एक रात नीता का फ़ोन क़रीब 3 बजे बजा। ये मयंक था।
नीता ने फ़ोन उठाया तो मयंक की कंपकपाहट को वो उसकी आवाज़ में साफ़ सुन पा रही थी।

मयंक, क्या हुआ?” नीता ने पूछा।
“उसे, उसे मेरा दिल चाहिए नीतामयंक की आवाज़ आयी।
किसे? मम्मी को?” नीता ने जानने की कोशिश की।
नहीं,” मयंक चीखा, “राहुल! राहुल अपना दिल वापस चाहता है।” 

ये सुनकर नीता ऐसी जड़ हुई की उसे तब होश आया जब उसका फोन उसके हाथ से फिसल कर नीचे जा गिरा। उसने मयंक को हौंसला बनाए रखने को कहा, और सीधा मुझे फ़ोन किया।

मैं और नीता किसी काम के सिलसिले में दक्षिण भारत आए हुए थे। मैंने अपने एक दोस्त से जो की उस हॉस्पिटल के पास ही रहता था, मयंक की खबर लेने के लिए कहा।

सुबह नाश्ता करते वक्त मेरे उस दोस्त का फ़ोन मेरे पास आया।
उसने मुझे बताया की रात को ही मयंक की मौत उसके दिमाग़ की नस फटने से हो चुकी थी।
नीता और मैंने एक दूसरे की ओर देखा और उसके बाद हमने इस बारे में कोई बात नहीं की। लगभग एक हफ़्ते के बाद जब हम दिल्ली वापस पहुँचे तो हम मयंक के बारे में भूल चुके थे।

लेकिन अभी कुछ दिन पहले मुझे ये क़िस्सा याद आया तो मैंने उस अस्पताल में पूछताछ की जहां से मुझे पता पड़ा, की मयंक की मौत के बाद राहुल का वो दिल, किसी और पेशेंट को दे दिया गया था।

पता नहीं कौन है वो बदकिस्मत, जिस से राहुल अपना दिल वापस माँग रहा होगा।
भगवान उसकी आत्मा को शांति दे।


लेखक: स्वप्निल नरेंद्र 

सम्पादक: अलका मिश्रा 



Hindi Horror Story Dil

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