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सिलाई मशीन (SILAAI MACHINE) HINDI HORROR STORY

“ दीदी मैं बहुत मुसीबत में हूँ। मेरी सिलाई मशीन पता नहीं कहाँ चली गयी है। उसके बिना मैं काम कैसे करूँगा दीदी ? मेरी सिलाई मशीन ढूँढवा दो दीदी। ” राकेश रेणु के सामने गिड़गिड़ा रहा था।

अंडा (ANDAA) HINDI HORROR STORY



ये कहानी शायद आपने भी कहीं सुनी हो। मैंने भी सुनी थी बचपन में, लेकिन ये कहानी सबसे पहले किसने किसे सुनायी, ये बात कोई नहीं जानता।

अक्सर छोटे क़स्बों और शहरों में आपको ना जाने कितने ही ऐसे मकान मिल जाएँगे जो ना जाने कब से ख़ाली पड़े रहते हैं। मेरे मोहल्ले में भी ऐसा ही एक मकान था। 

सब बताते हैं की उस मकान में आज से कई साल पहले एक बूढ़ा रहता था, जो बहुत खड़ूस था। गली में क्रिकेट खेलते लड़कों की बॉल अगर उसके घर में चली जाती तो वो वापस नहीं देता था। मौहल्ले के लड़के अक्सर बातें करते की अगर उस बूढ़े के घर में चोरी छिपे जाएँ, तो अंदर ना जाने कितनी ही बॉलें मिलेंगी। शायद अनगिनत।

लेकिन उसके घर में जाने की हिम्मत किसी की ना हुई। यहाँ तक कि उस बूढ़े को मौहल्ले वाले अपने किसी तीज त्यौहार में भी ना बुलाते। सुनने में आता था की उस बूढ़े का परिवार कभी उसी के साथ उस घर में रहता था। बूढ़ा तब इतना खड़ूस नहीं होता था। 

उसके घर में उसकी बीवी और इकलौता बेटा ही थे। लेकिन एक दिन अचानक ही, उसका बेटा पता नहीं कहाँ से शादी कर लाया। और बूढ़े को ये बात बिलकुल पसंद नहीं आयी। वो जब तब अपनी बहु पे चीखता, और उसे गंदी गंदी गालियाँ देता, जिसे पूरा मौहल्ला सुनता। उसके बाद बूढ़े और उसके बेटे में खूब कहा सुनी होती।

उस घर की बहु अपनी सास के मरने के बाद वो घर छोड़ कर चली गयी। और उसके कुछ ही दिनों बाद उस बूढ़े का बेटा अपने कमरे के पंखे से लटका हुआ मिला।

बस तभी से उस घर में वो बूढ़ा अकेला रहता आ रहा था। लेकिन कुछ सालों बाद, वो भी इस दुनिया से चल बसा। 

तब से उस बूढ़े का वो घर ख़ाली पड़ा है। पड़ोसी अपनी छत से आलस में आकर अपना कचरा उसमें डालते रहते हैं। लेकिन उसमें कोई जाता नहीं है। यहाँ तक कि उस घर को अपना बताने, उस बूढ़े का कोई रिश्तेदार भी आज तक नहीं आया।


बूढ़े की मौत को कई साल बीत चुके थे जब एक दिन रिंकू और पवन गली में क्रिकेट खेल रहे थे। उनकी बॉल उस बूढ़े के घर में जा गिरी। पैसे दोनों के ही पास नहीं थे की नयी बॉल ये आएँ, इसीलिए दोनों की बहस शुरू हो गयी की बॉल कौन लाए। और अंत में यह तय हुआ की दोनों ही जाकर बॉल लेकर आएँगे। 

घर के दरवाज़े पर कोई ताला नहीं था, लेकिन फिर भी उस घर में किसी के घुसने की हिम्मत नहीं होती थी। क्यूँकि मोहल्ले के कई लोगों ने अक्सर उस बूढ़े को अपने घर के आँगन में टहलते देखा था।

लेकिन वो सब रात में होता था, इसीलिए रिंकू और पवन थोड़ी सी हिम्मत करके उस घर में दाखिल हो गए। कबाड़, और पुराने गलते हुए सामान के बीच, उन दोनों लड़कों ने देखा, की उनकी प्लास्टिक की बॉल वहाँ आँगन में चुपचाप पड़ी हुई उन्हीं का इंतज़ार कर रही थी। दोनों लड़के झटपट बॉल उठा कर चलने लगे की तभी उन्होंने देखा -

उस आँगन ने सटे एक कमरे में ना जाने कितनी ही बॉलों का एक ढेर लगा हुआ था। उस ढेर में हर तरह की बॉल थी, प्लास्टिक की, रबर की, टेनिस वाली, और यहाँ तक की एक लैदर की बॉल भी। रिंकू और पवन उस ख़ज़ाने को देख कर अपनी बॉल को मानो भूल ही गए।

दोनों ने उस कमरे के दरवाज़े को देखा, जो कई सालों ने ना खुलने की वजह से जाम हो गया था। लेकिन लालच के आगे कौनसी ताक़त टिकी है भला ? दोनों बच्चों ने ज़ोर लगाकर उस दरवाज़े को तब तक धकियाया, जब तक वो दरवाज़ा दीवार से ना जा चिपका। अब रिंकू और पवन, उस बॉल के ख़ज़ाने के सामने खड़े थे। 

वैसे तो उसमें सभी तरह की 
बॉलें थीं, लेकिन रिंकू और पवन की नज़र उस ढेर में पड़े एक बड़े से सफ़ेद अंडे की ओर गयी। 

अंडा जानते हो ना ? 

वो बड़ी सी प्लास्टिक की बॉल जो "कट्ट कट्ट" की बड़ी प्यारी आवाज़ करती है? 
कहते हैं प्लास्टिक के बॉलों की रानी होती है वो।

बस फिर क्या था, इस रानी के लिए दोनों राजकुमार भिड़ पड़े।
रिंकू बोलता अंडा उसका है। और पवन कहता "अबे चल बे।"

अपनी इस लड़ाई में उन दोनों लड़कों को पता ही नहीं चला की कब उस कमरे का जाम हुआ दरवाज़ा, धड़ाम से अपने आप बंद हो गया। 

रिंकू और पवन भाग कर दरवाज़े पर गए और उसे खोलने की बहुत कोशिश की, लेकिन दरवाज़ा अपनी जगह से ना हिला। और तभी एक ज़ोर की आवाज़ के साथ उस कमरे की खिड़की भी अपने आप ही बंद हो गयी। अब, उस कमरे में घुप्प अंधेरा था। 

लेकिन उस ढेर में पड़ा वो सफ़ेद अंडा मानो चमक रहा था। 

वो दोनों लड़के रोते सहमते, डरके मारे एक कोने में सिमट गए, जब उन्होंने देखा की वो अंडा अपने आप हवा में उठा और उनकी तरफ़ बढ़ने लगा। और जब वो अंडा उन दोनों के पास आया तब उन्होंने देखा की वो उड़ नहीं रहा था। बल्कि वो एक हाथ के ऊपर रखा था, और ये हाथ जुड़ा हुआ था, एक अजीब से दिखने वाले बूढ़े के शरीर से। 

“बॉल चाहिए?” 
उस बूढ़े ने एक अजीब सी आवाज़ के साथ पूछा, 
“ये ये अंडा चाहिए तुम दोनों को? मेरे घर में घुस के चोरी करोगे?” 

उन दोनों लड़कों के चेहरे पर सिवाय डर के और कोई भाव नहीं था। 


एक चीख, उस दोपहरी में उस घर से निकली, लेकिन उसे सुनने वाला कोई नहीं था। और कई दिनों तक उन बच्चों को ढूँढने के बाद, उनकी लाशें, उस घर के कमरे से मिलीं।
लेकिन ना उस कमरे में वो 
बॉलों का ढेर था, और ना ही वो सफ़ेद अंडा।


क्या आपने भी सुनी है ऐसी कोई कहानी? 




Hindi Horror Story Andaa





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