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सिलाई मशीन (SILAAI MACHINE) HINDI HORROR STORY

“ दीदी मैं बहुत मुसीबत में हूँ। मेरी सिलाई मशीन पता नहीं कहाँ चली गयी है। उसके बिना मैं काम कैसे करूँगा दीदी ? मेरी सिलाई मशीन ढूँढवा दो दीदी। ” राकेश रेणु के सामने गिड़गिड़ा रहा था।

अब आप यहीं रहेंगे - HINDI HORROR STORY


ना जाने ये घर कब से ख़ाली पड़ा है। मानो कितने सालों से कोई यहाँ नहीं रहा हो। घर की दीवारों से सूख कर लटकती पपड़ी, और टूटे खिड़की के काँच बताते हैं की शायद कोई तो चीज़ इस घर से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है।

घर की अलमारियों के खुले पल्ले देख कर एहसास होता है कि कोई इस घर से बड़ी जल्दी में भाग कर गया है। लेकिन आज, इस घर में एक हलचल होने वाली है। इस घर का इंतज़ार आज ख़त्म होने वाला है।

एक ज़ोर की आवाज़ के साथ घर का मेन गेट खुला और दो परछाइयों ने घर के अंदर प्रवेश किया। पहला, एक नाटा आदमी लंगड़ाता हुआ घर में घुसा। वो घर में घुसने के पहले से ही घर की शान में क़सीदे पढ़े जा रहा था। यह ब्रोकर है।

"ये घर आपको हंडरेड परसेंट पसंद आएगा।" वो बोला।

और ब्रोकर के पीछे पीछे घर में घुसा, चेहरे पर थकान, टी शर्ट में पसीना और आँखों में ढेर सारी उम्मीदें लिए चेतन, जो उस ख़ाली फ़्लैट के हर एक कोने को बड़ी बारीकी से देख रहा था। यूँ तो वो इस घर में पहली बार आया था पर पता नहीं क्यूँ, उसे इस घर में एक अजीब से  अपनेपन का एहसास हो रहा था। मानो वो घर चेतन को जनता हो।

ब्रोकर अभी भी फ़्लैट चालीसा गाए जा रहा था, पर चेतन इतनी देर में अपना मन बना चुका था। सो वो ब्रोकर की तरफ़ मुड़ा और बोला, “मुझे ये घर पसंद है।


ब्रोकर ने भी बिजली की फ़ुर्ती से घर की चाबी चेतन के सामने लटकाते हुए कहा

बस, अब आप यहीं रहेंगे।


चेतन हंसा, "बिना अग्रीमेंट के चाबी? मैं भाग गया तो?"


"अब आप कहीं नहीं जाने वाले। काग़ज़ मैं बनवा लूँगा। आप बस अपना सामान ले आओ।" ब्रोकर बिना किसी फ़िक्र के घर के दरवाज़े से बाहर निकल चुका था।


... ... ...


कुछ ही दिनों में उस मकान को रहने लायक़ बना दिया गया, और जल्द ही चेतन ने उस मकान को एक घर में तब्दील कर दिया। लेकिन कुछ ही दिनों में उसे समझ आ गया की इस घर का किराया इतना कम क्यूँ है।


चेतन को उस घर में एहसास होता की वो अकेला नहीं है। घर में बैठे, सोते, यहाँ तक कि जागते हुए भी उसे किसी की मौजूदगी का एहसास होता रहता। लेकिन वो इसे अपना वहम समझ कर टालता रहा। 


पर एक रात, उसे यक़ीन हो गया कि ये वहम नहीं था।


ऑफ़िस से आने के बाद चेतन TV के सामने सोफ़े पर बैठ कर अपना खाना खा कर उठा ही था। उसने TV बंद किया और किचन की ओर चल पड़ा। लेकिन किचन में बर्तन धोते वक्त उसे TV के चलने की आवाज़ आयी। 


चेतन ने किचन से बाहर आकर देखा तो उसका TV वाक़ई में चल रहा था। उसने रिमोट उठा कर TV को बंद कर दिया, लेकिन ये क्या, TV फिर से चल पड़ा। चेतन बार बार TV बंद करे, और TV बार बार चलता जाए। 


अंत में हार कर चेतन ने रिमोट से में से बैटरी ही निकाल दीं। 

एक, दो, तीन, चार -- चेतन मन ही मन गिनता रहा, और जब तक वो 8 पर आया, TV अपने आप फिर से चल पड़ा था। एक अजीब सी सिहरन चेतन के बदन में दौड़ गयी। और उसने एक झटके से TV का तार दीवार से जुदा कर दिया। 


चेतन, TV के तार को हाथ में लिए रेल की तरह दौड़ती धड़कन के साथ गिनने लगा, 1, 2, 3, 4 -- 10, 11, यहाँ तक कि 30, 31 और 50 भी आ गया, पर वो TV फिर नहीं चला। 


चेतन ने साँस और TV का तार एक साथ छोड़ दिए और सोने चला गया। लेकिन रात को किसी के बात करने की आवाज़ से उसकी आँखें खुलीं। वो साफ़ सुन पा रहा था कि उसके घर में उसके अलावा कोई दो शख़्स आपस में बात कर रहे थे। 


डरते डरते चेतन अपने बिस्तर से उठा और धीरे से उसने बेडरूम का दरवाज़ा खोल कर हॉल में झांका। हॉल में TV चल रहा था जिस पर किसी फ़िल्म में दो लोग आपस में बात कर रहे थे। 


चेतन को समझ नहीं आ रहा था कि वो अब क्या करे, लेकिन उसके पैर अपने आप ही TV की ओर चल पड़े। वहाँ जाकर उसने देखा, TV का तार वापस दीवार में लगा हुआ था। 



उस रात के बाद ऐसी घटनाएँ आम हो गयीं। TV जब चाहता अपने आप चल उठता। उसकी आवाज़ भी अपनी ही मर्ज़ी की मालिक हो गयी। साथ ही घर के लाइट और पंखे भी आत्म निर्भर बन चुके थे। एक तरह से चेतन अब उस घर का मालिक नहीं रह गया था। जिस चीज़ का जब मान आता, अपने आप चल पड़ती। एक सुबह जब चेतन ऑफ़िस जाने के लिए अपने जूते ढूँढ रहा था, तो उसने देखा, की उसका एक जूता सोफ़े के नीचे से अपने आप फिसल कर ऐसे सामने आया, मानो किसी ने उसमें लात मारी हो।


चेतन चीखता हुआ घर से बाहर भाग गया। 


चेतन ने ब्रोकर को कई बार फ़ोन करने की कोशिश की, लेकिन उसका नम्बर कभी मिलता ही नहीं। उसने कुछ रातें, किसी सस्ते होटल में बिताने की कोशिश की, लेकिन खर्चे की वजह से उसे घूम फिर कर वापस घर आना ही पड़ा। 


उसने इस घर के साथ एक समझौता कर लिया था। 

लेकिन एक रात ये सब बदल गया।


अपने डर को भूलने के लिए चेतन ने अब शराब पीना शुरू कर दिया था। और उस रात भी वो शराब के नशे में धुत्त अपने आप चले TV को देख रहा था, की तभी दरवाज़े की घंटी बाज़ी। उसका ऑर्डर किया हुआ खाना लेकर डिलीवरी वाला लड़का आ चुका था।


नशे की हालत में चेतन ने खाना लिया और लड़के को क़ीमत के साथ एक भारी सी टिप भी दी, जो उस लड़के ने नोटिस की। पर उस लड़के ने एक और चीज़ नोटिस की, वो ये, की नशे की हालत में चेतन ने घर का दरवाज़ा खुला ही छोड़ दिया था। 


थोड़ी देर बाद उस खुले दरवाज़े से वही लड़का चुपचाप भीतर दाखिल हुआ। उसने देखा, चेतन सोफ़े पर बेहोश पड़ा था। लड़का बिना कोई आवाज़ किए भीतर घुसा और सीधा बेडरूम में गया, जहां उसने क़ीमती चीजें अपने बाग में भरनी शुरू कीं। 


लेकिन तभी उस लड़के को बाहर से एक खटका सुनायी दिया। अपनी जेब से एक चाकू निकाल कर वो लड़का बेडरूम से बाहर निकला और उसने देखा, सोफ़े पर चेतन नहीं था। 


"साले चोर!" चीखता हुआ चेतन पीछे से उस लड़के पर कूदा। लेकिन नशे में होने के कारण वो लड़ने के लायक़ नहीं था। उस लड़के के हाथ से चाकू भले ही छूट गया था लेकिन वो शरीर में चेतन से दोगुना था। उसने चेतन को ज़मीन पर लिटा कर पहले उसके मुँह पर मुक्कों की बरसात की, और फिर उसके बाद, अपने मोटे और मज़बूत हाथ चेतन की गर्दन पर कस दिए। चेतन ने लड़ने की काफ़ी कोशिश की, लेकिन फिर उसकी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा। चेतन के हाथ पैर ढीले पड़ गए और उसने अपनी मौत को स्वीकार कर लिया। 


भड़ाक की एक आवाज़ के साथ, शराब की बोतल टेबल से उड़कर उस लड़के के सर से टकराई। खून की एक धार लड़के से सर से बह निकली। वो पीछे पलटा और उसने देखा --  


वो शराब की बोतल हवा में तैर रही थी ...



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HINDI HORROR STORY AB AAP YAHIN RAHENGE


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