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सिलाई मशीन (SILAAI MACHINE) HINDI HORROR STORY

“ दीदी मैं बहुत मुसीबत में हूँ। मेरी सिलाई मशीन पता नहीं कहाँ चली गयी है। उसके बिना मैं काम कैसे करूँगा दीदी ? मेरी सिलाई मशीन ढूँढवा दो दीदी। ” राकेश रेणु के सामने गिड़गिड़ा रहा था।

शुक्रिया (SHUKRIYA) भाग 1 - HINDI HORROR STORY PART 1



नीना के लम्बे और घुंघराले बाल समीर के चेहरे पर झूल रहे थे।

यूँ तो नीना उसे छेड़ रही थी, लेकिन समीर को इसमें बड़ा मज़ा आ रहा था। जैसे जैसे नीना अपने बाल समीर के जिस्म पर फ़ेरती, वो देखती कि कैसे समीर के रोंगटे खड़े हो जाते। 

जब नीना खड़ी होती, तो समीर देखता की कैसे उस लड़की के बाल उसके घुटनों से भी नीचे लटकते थे। और जब वो बाल खोल कर चलती, तो पीछे से देखने पर ऐसा लगता मानो बालों का एक झुरमुट हो जिसमें पूरी दुनिया गुम हो जाए। नीना के लम्बे और घुंघराले बालों की वजह से ही समीर ने उस से दोस्ती की थी। 

नीना को लगता था की समीर उसे चाहता है, लेकिन वो बेचारी यह कहाँ जानती थी कि समीर की दिलचस्पी तो सिर्फ़ उसके बालों में थी।

और उस दिन जब समीर ने नीना की गोद में लेटे लेटे उससे पूछा, की उसके इन खूबसूरत बालों का राज़ क्या है?

तब नीना पहले तो थोड़ा झिझकी, लेकिन फिर समीर के ज़िद करने पर उसने बताया कि असल में वह एक तंत्र साधिका है, और अपने बालों को इतना लम्बा और खूबसूरत उसने एक ऐसी ही एक साधना से बनाया है। 

यह सब सुनकर समीर ने जैसे तैसे अपनी हंसी पर क़ाबू रखा। पर इस बीच नीना अब उसे तंत्र, मंत्र और सिद्धियों की वह बातें बताने लगी, जिन से समीर को कोई लेना देना नहीं था। वह जो चाहता था, उसके सामने था। बात करते करते, नीना को पता ही नहीं पड़ा कि कब समीर ने एक कैमिकल में डूबा कपड़ा, उसकी नाक के आगे रख दिया।

एक तेज़ गंध नीना की नाक में घुसी जिसने उसके दिमाग़ को झँझोड़ कर रख दिया। नीना किसी छिपकली की तरह छटपटाई और निढाल होकर बिस्तर से नीची जा गिरी। समीर आराम से यह सब देखता रहा। वो जानता था कि नीना की यह छटपटाहट सिर्फ़ कुछ ही देर की है। 

और थोड़ी देर बाद नीना का बदन उसके क़ाबू से बाहर होकर एकदम शिथिल पड़ चुका था। वो सब कुछ देख, सुन और महसूस कर पा रही थी, लेकिन उसके जिस्म को मानो लकवा मार गया था। उसने अपनी पूरी ताक़त इकट्ठी करके हिलने की कोशिश की, लेकिन सब बेकार। फिर उसने चीखना चाहा, लेकिन उसकी आवाज़ उसके गले तक पहुँचने से पहले ही भीतर ही कहीं दम तोड़ गयी।

तब तक समीर अपने बैग से अपने औज़ार निकाल कर नीना के पास पहुँच चुका था। नीना देख पा रही थी, की समीर के हाथ में एक मोटर से चलने वाली गोल आरी और एक चिमटे जैसा प्लायर था। वो नहीं जानती थी की समीर उसके साथ क्या करने वाला है, लेकिन अपने अंजाम के बारे में सिर्फ़ सोच कर ही नीना के ठंडे पड़े बदन में एक सिहरन दौड़ जाती थी।

समीर ने उस चिमटे से नीना की बाजू पर एक ज़ोर की चिकोटी काटी। नीना ने चीखना चाहा लेकिन उसकी आवाज़ नहीं निकली। समीर, नीना की आँखों में उसका दर्द पढ़ चुका था। वो समझ चुका था की उसका कैमिकल अपना काम कर चुका है।

समीर ने काफ़ी खोजबीन के बाद यह कैमिकल खुद ही ईजाद किया था। उस कैमिकल के असर से शरीर को लकवा मार जाता था, लेकिन स्नायु तंत्र एकदम सजग रहता। मतलब यह, की समीर के उस कैमिकल से, उसके शिकार का शरीर बेजान तो हो जाता, लेकिन वो सब देख, सुन और महसूस कर पाते। और नीना अब समीर और उसके कैमिकल की इस दरिंदगी का शिकार बनने वाली थी।

समीर ने एक प्लास्टिक का रेनकोट पहना और अपनी मोटर वाली आरी को ऑन किया। एक हल्की लेकिन गहरी आवाज़ के साथ उस आरी में लगा स्टील का गोल ब्लेड तेज़ी से घूमने लगा। समीर, नीना की ओर देख कर मुस्कुराया।

नीना की आँखों में सिवाय ख़ौफ़ के कुछ और नहीं था।


इसके बाद समीर सीधा नीना की छाती पर जा बैठा और अपना काम करने लगा। उसने वह आरी नीना के माथे पर उसके बालों से एक इंच नीचे लगा दी। खून की कई सारे धारें उस आरी को भिगोती हुई, समीर के उस प्लास्टिक के सस्ते रेनकोट को रंगती चली गयीं।

नीना का जिस्म और उसकी आत्मा दर्द से अंदर ही अंदर मरोड़ें खाए जा रही थीं, लेकिन बाहर से उसकी एक उँगली भी नहीं हिल पा रही थी। वो लड़की अपने ऊपर होते इस हैवानियत के दर्द को पूरी तरह महसूस कर पा रही थी। लेकिन उसकी नियति यही थी, कि वो चिल्ला कर अपने इस दर्द की गवाही भी नहीं दे सकती थी।

समीर का हँसता हुआ चेहरा मानो उसके इस दर्द में हज़ार गुना इज़ाफ़ा कर रहा था।

नीना की आँखों से आंसुओं की एक धार बह चली। वैसे तो ये आंसू दर्द की वजह से थे, लेकिन इनमें से कुछ पछतावे और बेबसी के थे। नीना की आत्मा ने कब उसका जिस्म छोड़ा, उसे पता ही ना चला। समीर ने जब अपना काम ख़त्म किया, तब तक उस लड़की की आँखें पथरा चुकी थीं।

अंत में एक हल्के के झटके के साथ समीर ने नीना की लाश पर से उसके बालों को खींचा। ‘पप्प’ की एक धीमी मगर अजीब सी सुकून भरी आवाज़ के साथ नीना के सर का वो हिस्सा जिसमें उसके बाल जुड़े थे, समीर के हाथ में आ गया। उसने बड़े क़रीने से उन बालों को नीना के जिस्म से अलग किया और अपने बैग की तरफ़ चल दिया। इसके बाद समीर ने नीना के घर से अपनी मौजूदगी के सभी सबूत मिटाए और वहाँ से उन बालों को लेकर चला गया।

ये समीर का पहला शिकार नहीं था। वो पहले भी ये कर चुका था, कुल मिलाकर 8 बार। और नीना के साथ उसके शिकारों की गिनती 9 तक पहुँच चुकी थी। न्यूज़ चैनल्ज़ पर भी समीर के शिकारों के क़िस्से बड़े शौक़ से दिखाए जाते। उसके नाम और शकल से तो कोई वाक़िफ़ नहीं था, इसीलिए न्यूज़ चैनल वालों ने एक नाम खुद ही समीर को दे दिया था - बाल चोर।

समीर को हालाँकि यह नाम पसंद नहीं था, लेकिन अपनी खबर सुनकर और देखकर वह बड़ा खुश होता। और आज तो वह और भी ज़्यादा खुश था। नीना के बालों पर उसकी नज़र काफ़ी वक्त से थी, और आज वो उन बालों को अपने घर ले आया था। 




अपने घर पहुँचने के बाद समीर ने सबसे पहले नीना के बालों को साफ़ किया। अब उन बालों में नीना के खून का एक भी कतरा ना बचा था। धोने और सूखने के बाद समीर उन बालों को अपनी गोद में रखकर बड़े प्यार से ब्रश करने लगा। और जब वे बाल तैयार हो गए, तो समीर उन्हें लेकर आइने के सामने गया। अपने आपको देखते हुए, समीर ने वो बाल अपने सर पर किसी टोपी की तरह पहन लिए। काफ़ी देर तक वो अपने इस रूप को आइने में निहारता रहा। वो कभी घूमता, कभी बालों को अपने हाथों में लेता, तो कभी उन्हें सूंघता। इस सब में समीर को बड़ा मज़ा आ रहा था।

नीना के उन लम्बे बालों ने समीर के ठिगने बदन को पूरी तरह से ढक दिया था। उसे देखने पर ऐसा लगता मानो समीर ने बालों से बनी कोई ड्रेस पहन रखी हो। वह इसी तरह नीना के उन बालों से खेलता रहा। उस रात का खाना भी उसने नीना को पहन कर खाया। और फिर जब वो खेलकर थक गया, तो समीर ने उन बालों को उतारा और अपनी ख़ास अलमारी में रख दिया।

उस अलमारी में नीना के बालों के साथ 8 और बाल रखे थे। सभी बाल एक से बढ़कर एक खूबसूरत, घने और लम्बे। समीर एक ख़ास कैमिकल से उन बालों को पोषण देता रहता, जिस से वो सूखकर मुरझाएँ ना। थोड़ी देर तक उन सभी बालों को प्यार से निहारने के बाद समीर ने उन्हें शुभरात्रि बोला और अलमारी बंद करके सोने चला गया।

देर रात, समीर के गले में ख़राश से उसकी नींद उचट गयी। भारी कदमों से चलकर वह रसोई में गया और एक ग्लास ताज़ा पानी पिया। लेकिन जैसे ही उसने ग्लास रखा, वह कुछ देखकर चौंक गया।

काँच के उस ग्लास के अंदर समीर को कुछ लम्बे बाल नज़र आए।

समीर यह सोचता रहा की वो बाल उस ग्लास के अंदर कैसे पहुँचे होंगे कि तभी उसे अपने पेट में एक ज़ोर का कसाव महसूस हुआ। देखते ही देखते वो कसाव पेट से सरकता हुआ समीर के गले और फिर मुँह तक आ पहुँचा, और एक ज़ोर की खांसी के साथ, समीर ने सिंक में उल्टी कर दी। उल्टी करने के बाद समीर ने जब सिंक में झांका तो देखा, कि अंदर एक बालों का गुच्छा पड़ा है। वो बाल लम्बे और घुंघराले थे, बिलकुल नीना के बालों की तरह।

स्लैब पर टिके समीर के हाथ काँपने लगे, और तभी उसके कानों से नीना के हंसने की आवाज़ टकरायी। समीर ने घबरा कर चारों ओर देखा, लेकिन उसके अलावा पूरे घर में उसे कोई नहीं नज़र आया। उसका पेट एक बार फिर मुड़ा, और एक और उल्टी के साथ समीर ने बालों का एक और लम्बा गुच्छा सिंक में निकाल दिया। लेकिन उल्टी की बजाय समीर के मुँह से बाल निकल रहे थे। वो खींचता जाता, और उसके मुँह से बाल निकलते जाते। समीर ने चीखना चाहा, लेकिन उसकी आवाज़ शायद उन बालों में कहीं गुम हो गयी थी।

तभी समीर का ख़ाली घर, नीना की तेज हंसी से गूंज उठा।

समीर के पैरों के नीचे की ज़मीन मानो मीलों आगे निकल गयी। वो फिसल कर ज़मीन पर गिरा और उसने देखा, कि घर के अंधेरे में एक परछाईं उसके ठीक सामने खाने की मेज़ पर बैठी उसे ही घूर रही थी। अंधेरे के बावजूद, समीर उस परछाईं को पहचान पा रहा था। समीर अपने आपको देख रहा था।

मेज़ पर बैठे समीर के हाथ में एक चम्मच थी, और वो अपने आगे रखी प्लेट में से कुछ खा रहा था। गौर से देखने पर समीर ने पाया कि उस प्लेट में घुंघराले बालों का एक गुच्छा रखा था, जिसे वो पथराई आँखों के साथ खाए जा रहा था।

यह मंजर देखकर समीर का जिस्म जैसे अकड़ गया। थमी धड़कन और साँसों के साथ समीर को पता ही नहीं चला की नीना कब उसके पीछे आ बैठी। उसने समीर के कानों में फुसफुसाते हुए कहा,


“मैं तुझे कुछ भी दे सकती थी बेवक़ूफ़। लेकिन तुझे सिर्फ़ मेरे बाल चाहिए थे।”






HINDI HORROR STORY SHUKRIYA PART 1

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