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सिलाई मशीन (SILAAI MACHINE) HINDI HORROR STORY

“ दीदी मैं बहुत मुसीबत में हूँ। मेरी सिलाई मशीन पता नहीं कहाँ चली गयी है। उसके बिना मैं काम कैसे करूँगा दीदी ? मेरी सिलाई मशीन ढूँढवा दो दीदी। ” राकेश रेणु के सामने गिड़गिड़ा रहा था।

शुक्रिया (SHUKRIYA) भाग 2 - HINDI HORROR STORY PART 2



समीर का दिल इतनी ज़ोर से धड़का मानो उसकी छाती फाड़ कर बाहर आने को तैयार हो। वो चीखता हुआ नीना से दूर हटा, लेकिन वो औरत उसके पीछे पीछे चिल्लाती हुई आयी, “तूने सिर्फ़ मेरे जिस्म को मारा है कुत्ते। और अब, मैं तुझे मारूँगी!” 


नीना हवा की तरह उड़ती हुई समीर से आकर चिपक गयी, और उसने अपने हाथ ऊपर उठाए। समीर ने देखा कि नीना के हाथों की जगह बालों के लम्बे और मोटे गुच्छे थे। समीर ने फिर से चीखने के लिए मुँह खोला, लेकिन नीना के बाल उसके मुँह में घुस गए। वो अब चाह कर भी नहीं चिल्ला पा रहा था। उसे महसूस हो रहा था की कैसे नीना के बाल अब उसकी अंतड़ियों के अंदर सरक रहे हैं। उसने एक बार फिर अपनी पूरी ताक़त जुटा के चिल्लाने की कोशिश की।

और एक ज़ोर की चीख के साथ समीर अपने बिस्तर में चिल्लाते हुए उठ बैठा। उसका पूरा जिस्म पसीने से तार हुआ पड़ा था। वो समझ गया था की यह सब एक सपना था।

सूखे गले और भीगे बदन के साथ समीर पानी पीने के इरादे से रसोई की तरफ़ बढ़ा, लेकिन तभी उसे अपना सपना याद आ गया। पानी पीने का ख़याल छोड़ कर समीर थोड़ी ताज़ी हवा खाने के लिए खिड़की के पास जाने के लिए बिस्तर से नीचे उतरा।

लेकिन जैसे ही उसने ज़मीन पर पैर रखा, उसके पेट में एक ज़ोर का दर्द उठा। वो छटपटाता हुआ ज़मीन पर जा गिरा। उसने अपने पेट पर हाथ लगाया, तो महसूस किया की उसका पेट किसी पत्थर की तरह ठोस हो चुका था। अपनी शर्ट हटा कर उसने देखा कि उसके पेट में से कोई चीज़ बाहर आने के लिए मशक़्क़त कर रही थी। 

और तभी समीर का पेट किसी ग़ुब्बारे की तरह फट गया। खून और मांस के टुकड़ों के साथ ना जाने क्या क्या समीर के घर और चेहरे पर फैल गया। उसके बाद समीर ने जब अपने फटे हुए पेट पर निगाह डाली तो उसे अपनी आँखों पर यक़ीन नहीं हुआ।

समीर के पेट के अंदर सिर्फ़ और सिर्फ़ बाल दिखायी दे रहे थे। अंतड़ियों और पेट की जगह मोटी मोटी बालों की चोटियाँ बिजली के तारों की तरह एक ऊपर एक फिसल रही थीं। दर्द और दहशत ने मिलकर समीर को चीखने पर मजबूर कर दिया। उसके मुँह खोलते ही, वो बाल उसके पेट से सरकते हुए उसके गले से होकर मुँह से बाहर निकल आए। इसके बाद वो बाल समीर के बदन के हर छेद से निकलने लगे। बालों ने धीरे धीरे समीर को अपने अंदर वैसे लपेटना शुरू कर दिया, जैसे एक मकड़ी अपने शिकार को अपने जाल में लपेटती है। 


समीर समझ चुका था कि ये सब भी एक सपना ही था और उसने वही किया जो कोई भी शख़्स एक डरावने सपने से बाहर आने के लिए करता। उसने बिस्तर के पास रखी मेज़ के ड्रॉअर से एक कैंची निकली और बिना कुछ सोचे समझे, उसे अपनी गर्दन में एक ज़ोर के झटके के साथ घुसा दिया।


वो सपना नहीं था।


पहले खून की एक मोटी धार समीर के गले से निकली और फिर बालों का एक गुच्छा। समीर के जिस्म का सारा खून उसका साथ छोड़ रहा था। वह अब अपने शिकार की तरह ज़मीन पर बेजान लेता था। उसके जिस्म से खून के साथ साथ बाल निकल रहे थे जो उसे अपने आग़ोश में ले रहे थे। और वो ये सब देख और महसूस कर पा रहा था, लेकिन उसके जिस्म में अब हिलने की ताक़त नहीं बची थी।

और तब समीर की नज़र खिड़की के पास खड़ी एक परछाईं पर पड़ी।

नीना दूर से ये सब देख रही थी। वो धीरे धीरे बहती हुई समीर के पास आयी, और उसकी आँखों में आँखें डाल कर चुपचाप ये सब देखती रही। समीर के चेहरे पर फैले दहशत और दर्द को देख, नीना की आत्मा को एक सुकून मिल रहा था। लेकिन उसे इंतज़ार था समीर के चेहरे पर वही पछतावा और बेबसी देखने का, जिसे नीना ने मरते वक्त महसूस किया था।

काफ़ी सारा खून बह जाने की वजह से समीर का दर्द अब हवा हो चुका था। वो अब एक नशे के जैसी हालात में था। और तब उसने महसूस किया की उसका जिस्म अब बालों में घुल कर ग़ायब हो चुका था। उसके हाथ, पैर अब बेजान नहीं रह गए थे, बल्कि वो बाल ही अब उसके हाथ, पैर और पूरा जिस्म थे। समीर अब मांस और हड्डियों का ढाँचा नहीं, बल्कि बालों का एक बड़ा सा गुच्छा बन चुका था।

नीना, समीर के चेहरे के पास झुकी, जो की बालों के ढेर में से अब थोड़ा सा ही दिख रहा था। उसने देखा समीर के होंठ हिल रहे थे, मानो वो कुछ कह रहा हो। मुँह से निकलते बालों की वजह से समीर की आवाज़ साफ़ सुनायी नहीं दे रही थी। नीना झुक कर समीर के चेहरे के पास आयी और उसने सुने समीर के आख़िर शब्द। उसने कहा,


“शुक्रिया।”



इसके बाद समीर का नामो-निशान इस दुनिया से हमेशा के लिए मिट गया। उसके घर की ज़मीन पर अब एक बालों का बहुत बड़ा गुच्छा पड़ा था। और उस गुच्छे के साथ ज़मीन से 1 फ़ीट ऊपर तैर रही थी, नीना की आत्मा जो समझ नहीं पा रही थी की अब वो अपना बदला कैसे ले?

नीना की आत्मा ग़ुस्से से और भी ज़्यादा पागल हो गयी। एक तीखी चीख उसके मुँह से निकली जिस ने समीर के घर के काँच तोड़ दिए। लेकिन वो चीख सुनने के लिए अब वहाँ कोई नहीं था।

नीना ने एक बार फिर से उस घर को देखा। समीर अब वहाँ नहीं रहता था। वो बेचैन आत्मा अपना बदला लिए बिना वहाँ की हवा में घुल गयी।


उसे अब कभी अपना बदला नहीं मिलने वाला था।

(समाप्त)


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HINDI HORROR STORY SHUKRIYA PART 2

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